प्लेटलेट्स को बढ़ाने के घरेलू उपाय

हमारे शरीर में सभी अंग और सेल्स ही हैं, जो मिलकर हमें निरोगी और सेहतमंद जीवन देने में मदद करते हैं। कुछ ऐसा ही मैन रोल है ब्लड में मौजूद प्लेटलेट्स का है, जिनका शरीर में सही मात्रा में होना यह सुनिश्चित करता है कि हम स्वस्थ हैं । एक स्वस्थ व्यक्ति में सामान्य प्लेटलेट्स काउंट डेढ़ लाख से 4.50 लाख प्रति माइक्रोलीटर होता है, जब यह काउंट डेढ़ लाख  प्रति माइक्रोलीटर से नीचे चला जाए तो इसे लो प्लेटलेट माना जाता है। कई बार प्लेटलेट्स कम होने और न बनने की वजह से शरीर कई तरह के विकार और बीमारियों की चपेट में आ जाता है। 

प्लेटलेट्स क्या है?

ब्लड में तीन प्रकार की सेल्स होती हैं, रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स ,और प्लेटलेट। प्लेटलेट्स को थ्रोम्बोसाइट्स (Thrombocytes) भी कहा जाता है, जो ब्लड सेल्स के रंगहीन चिपचिपे छोटे-छोटे टुकड़े होते हैं। यह आपके बोन मैरो (Bone Marrow) में बनते हैं। प्लेटलेट्स ब्लड कलोटिंग (रक्त थक्के बनाने) में  प्रमुख भूमिका निभाते हैं। आमतौर पर, जब आपकी ब्लड वेसल डेमेज हो जाती है, तो आपका ब्लड बहने लगता है। इस दौरान आपके प्‍लेटलेट्स को सिग्नल भेजा जाता है. जिससे प्लेटलेट्स प्रभावित क्षेत्र में पहुंचकर ब्लड को बहने से रोकने के लिए डेमेज ब्लड vessels के ऊपर फैल जाती है और repair के लिए एक clot बनाती हैं. प्लेटलेट्स ब्लड vessels के होल को बंद करने और bleeding को रोकने में मदद करते हैं ।

प्लेटलेट्स कम होने के कारण?

प्लेटलेट काउंट कम होने को थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (Thrombocytopenia) कहा जाता है। इसके कई कारण होते हैं- 

  • अप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic anemia) । यह ऐसा विकार होता है, जिसमें शरीर के बोन मैरो पर्याप्त प्लेटलेट्स नहीं बनाते।
  • बोन मैरो शरीर में पर्याप्त प्लेटलेट्स तो बनाते हैं, लेकिन हमारा शरीर उन्हें नष्ट कर देता है या उनका उपयोग कर लेता है।
  • जब बॉडी का एक ऑर्गन spleen, वो बहुत सारे प्लेटलेट्स को अपने पास रख लेता है।
  • बोन मैरो में कैंसर, जैसे कि ल्यूकेमिया (Leukemia)।
  • सिरोसिस लिवर की अवस्था में, जिसमें लिवर में खराबी आ जाती है।
  • फोलेट की कमी।
  • विटामिन बी-12 की कमी।
  • बोन मैरो में इन्फेक्शन 
  • किमोथेरेपी।
  • एड्स।
  • कुछ दवाएं भी शरीर में पर्याप्त प्लेटलेट्स बनने नहीं देती हैं, जैसे क्लोरम्फेनिकोल (एंटीबायोटिक), एस्पिरिन और इबुप्रोफेन।
  • चिकनपॉक्स, मम्प्स ,रूबेला, डेंगू जैसी वायरस संबंधी बीमारियां।
  • प्रेगनेंसी, सर्जरी और इंफेक्शन की वजह से भी शरीर में प्लेटलेट्स नष्ट होने लगते हैं।

प्लेटलेट्स कम होने के लक्षण

प्लेटलेट्स की कमी के लक्षण अचानक या समय के साथ धीरे-धीरे दिखाई दे सकते हैं। कई बार तो हल्के थ्रोम्बोसाइटोपेनिया के कोई लक्षण नहीं होते हैं। ये ब्लड टेस्ट के दौरान ही सामने आते हैं:-

  • Outer bleeding आमतौर पर कम प्लेटलेट काउंट का पहला संकेत है। outerbleeding से बैंगनी, भूरे और लाल रंग के चोट जैसे निशान शरीर पर बन जाते हैं।
  • दांतों और मसूड़ों से ब्लड निकलना
  • यूरिन में ब्लड आना 
  • स्प्लीन का साइज बढ़ जाना
  • नाक से ब्लड निकलना
  • पीरियड्स में बहुत ज्यादा ब्लड निकलना
  • हल्की चोट के कारण भी देर तक खून का बहते रहना
  • कमजोरी होना

प्लेटलेट्स को बढ़ाने के घरेलू उपाय

  • पपीता और पपीते का पत्ता - डेंगू बुखार के कारण कम हुए प्लेटलेट्स को संतुलित करने में पपीता फायदेमंद होता है। प्लेटलेट्स संतुलित रखने के लिए नियमित रूप से पपीता खाएं। पपीते के पत्तों को पानी में उबालकर उसे ग्रीन टी के रूप में पिएं।
  • अनार - अनार एंटीऑक्सीडेंट व एंटी-इंफ्लेमेटरी जैसे कई गुणों से भरपूर है। वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, अनार प्लेटलेट्स को एक जगह एकत्रित होने से रोकता है. इसकी मदद से आपके प्लेटलेट्स काउंट में आने वाली कमी दूर हो जाती है। दरअसल, जब प्लेटलेट्स एक जगह इकट्ठे हो जाते हैं, तो प्लेटलेट काउंट कम हो जाता है और खून के थक्के बन जाते हैं।
  • कद्दू- एक शोध के मुताबिक, कम विटामिन-ए का सेवन करने वालों में प्लेटलेट कम पाए गए हैं। वहीं कद्दू मे विटामिन-ए प्रचुर मात्रा में होता है, जो प्लेटलेट को बढ़ाने में मदद करता है । इसके अलावा, कद्दू के बीज में इम्यूनोमॉड्यूलेटरी प्रभाव भी होता है ।
  • किशमिश- हमारे शरीर में आयरन की  कमी के कारण थ्रोम्बोसाइटोपेनिया या कम प्लेटलेट काउंट और एनीमिया जैसी समस्या हो सकती है। किशमिश स्‍वाद में मीठा होने के साथ ही आयरन से भरपूर होती है। यह आपके शरीर में रक्‍त उत्‍पादन को उत्तेजित करने में सहायक होती है, जो आरबीसी और प्लेटलेट  को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • व्हीट ग्रास (Wheatgrass) - व्हीट ग्रास का इस्तेमाल भी प्लेटलेट्स काउंट को बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। इसमें क्लोरोफिल, फोलिक एसिड, जिंक व विटामिन जैसे तमाम पोषक तत्व मौजूद हैं, जो शरीर की जरूरत को पूरा करते हुए प्लेटलेट काउंट को बढ़ाने में मदद करते हैं। व्हीट ग्रास प्लेटलेट को बढ़ाने के साथ ही इसमें इम्यूनोमॉड्यूलेटरी प्रभाव भी होते हैं । इम्यूनोमॉड्यूलेटरी प्रभाव वो होता है, जो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली में शरीर की जरूरत के हिसाब से बदलाव करता है। यानी अगर आपका इम्यून सिस्टम ही आपके प्लेटलेट्स को कम कर रहा है, तो उसे नियंत्रित करने में व्हीट ग्रास मदद कर सकता है।
  • विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थ - ब्लड vessels में ब्लड cloting वजह से भी प्लेटलेट काउंट में कमी आती है। ऐसे में कहा जा सकता है कि विटामिन-सी का सेवन करने से प्लेटलेट कम होने का कारण थ्रोमबोसिस (Thrombosis) को दूर किया जा सकता है। 
  •  हरी पत्तेदार सब्जियां - हरी पत्तेदार सब्जियां को फोलेट का अच्छा स्रोत माना जाता है, जो आपके कम होते प्लेटलेट काउंट को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
  • चुकंदर और गाजर - गाजर में फेनोलिक यौगिक पाए जाते हैं, जो पौधों में पाए जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट है। यह शरीर में प्लेटलेट को एकत्र होने से रोकता है। वहीं, चुकंदर में मौजूद नाइट्रिक ऑक्साइड भी प्लेटलेट को शरीर में एक जगह इकट्ठा होने नहीं देता है। ऐसे में इसकी मदद से प्लेटलेट्स काउंट में आने वाली कमी दूर हो जाती है। 


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