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समय के आधार पर निदान (Time Diagnosis)

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  निदान कैसे करें?(How to Diagnose the Disease?) (1) उम्र के अनुसार निदान (Diagnosis as per Age Factor) (2) माँसपेशीय निदान (Muscles Diagnosis) (3) समय के आधार पर निदान (Time Diagnosis) (4) मौसम के आधार पर निदान (Seasonal Diagnosis) (5) यिन-यांग के सिद्धान्त के आधार पर निदान (Diagnosis on Yin-Yang Principle Basis) (6) शरीर तंत्र के आधार पर निदान (Diagnosis as per Body System) (7) चेहरे के आधार पर निदान (Face Diagnosis) (8) रंगों द्वारा निदान (Diagnose by Colour) (9) सूँघकर निदान (Diagnose by Smell) (10) स्वाद के आधार पर निदान (Diagnose by Taste) (11) आवाज के आधार पर निदान (Diagnose by Sound) (12) आँखों को देखकर निदान  (Functional Eye Diagnose) (13) हाथों की जाँच करके निदान (Diagnose by Hand) (14) शरीर संरचना को देखकर निदान (Diagnose by Observation of Body Constitution) (15) जीभ देखकर निदान (Diagnose by Tongue) 3. समय के आधार पर निदान (Time Diagnosis) समय के आधार पर भी निदान किया जा सकता है। समय के आधार पर निदान हेतु समय को हम वर्ष दिन व घण्टे में बाँटते हैं तथा यह देखा जाता है...

माँसपेशीय निदान (Muscles Diagnosis)

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निदान कैसे करें?(How to Diagnose the Disease?) (1) उम्र के अनुसार निदान (Diagnosis as per Age Factor) (2) माँसपेशीय निदान (Muscles Diagnosis) (3) समय के आधार पर निदान (Time Diagnosis) (4) मौसम के आधार पर निदान (Seasonal Diagnosis) (5) यिन-यांग के सिद्धान्त के आधार पर निदान (Diagnosis on Yin-Yang Principle Basis) (6) शरीर तंत्र के आधार पर निदान (Diagnosis as per Body System) (7) चेहरे के आधार पर निदान (Face Diagnosis) (8) रंगों द्वारा निदान (Diagnose by Colour) (9) सूँघकर निदान (Diagnose by Smell) (10) स्वाद के आधार पर निदान (Diagnose by Taste) (11) आवाज के आधार पर निदान (Diagnose by Sound) (12) आँखों को देखकर निदान  (Functional Eye Diagnose) (13) हाथों की जाँच करके निदान (Diagnose by Hand) (14) शरीर संरचना को देखकर निदान (Diagnose by Observation of Body Constitution) (15) जीभ देखकर निदान (Diagnose by Tongue) 2. मांसपेशीय निदान (Muscles Diagnose) मनुष्य के शरीर के किसी भी अंग की ऊर्जा की कमी या आधिक्य का निदान माँसपेशीय तंत्र के आधार पर भी किया जा सकता है। शरीर के किसी भी अंग की बीम...

उम्र के अनुसार निदान कैसे करें? (How to Diagnose as per Age Factor)

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  निदान कैसे करें?(How to Diagnose the Disease?) (1) उम्र के अनुसार निदान (Diagnosis as per Age Factor) (2) माँसपेशीय निदान (Muscles Diagnosis) (3) समय के आधार पर निदान (Time Diagnosis) (4) मौसम के आधार पर निदान (Seasonal Diagnosis) (5) यिन-यांग के सिद्धान्त के आधार पर निदान (Diagnosis on Yin-Yang Principle Basis) (6) शरीर तंत्र के आधार पर निदान (Diagnosis as per Body System) (7) चेहरे के आधार पर निदान (Face Diagnosis) (8) रंगों द्वारा निदान (Diagnose by Colour) (9) सूँघकर निदान (Diagnose by Smell) (10) स्वाद के आधार पर निदान (Diagnose by Taste) (11) आवाज के आधार पर निदान (Diagnose by Sound) (12) आँखों को देखकर निदान  (Functional Eye Diagnose) (13) हाथों की जाँच करके निदान (Diagnose by Hand) (14) शरीर संरचना को देखकर निदान (Diagnose by Observation of Body Constitution) (15) जीभ देखकर निदान (Diagnose by Tongue) 1. उम्र के अनुसार निदान (Diagnose as per Age Factor)  मानव जीवन की अवस्थाओं को सिक्स-की की तरह छः भागों में बाँटा जा सकता है। जीवन की प्रत्येक अवस्था एक सिक्स-की अर...

Hemetite (Crystal Healing)

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Hematite is an iron oxide crystal and an important ore of iron. It is part of the trigonal crystal system and is often found in rocks and soil. Hematite has a metallic like luster and colors that range from black to grey and silver, along with more reddish-brown varieties. The meaning of Hematite is grounding and protection. Hematite Associations Chakras - Base Chakra Zodiac - Aries, Aquarius Planet - Mars Element - Fire/Earth Vibration - Number 9 Hemetide Braslet Buy Now   Healing with Hematite Hematite grounds and protects us.  It strengthens our connection with the earth, making us feel safe and secure.   It endows us with courage, strength, endurance and vitality.   A "stone for the mind", Hematite stimulates concentration and focus, enhancing memory and original thought. Hematite utilises the magnetic qualities of our yin-yang energies to balance the meridians within the body and to provide a stable equilibrium between the ethereal nervous system and ...

यूरिक एसिड (Uric Acid)

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यूरिक एसिड शरीर के सेल्स और हमारे आहार से बनता है। शरीर में यूरिक एसिड हमेशा होता है, यह यूरिन के जरिए शरीर से निकलता है। आमतौर पर किडनी यूरिक एसिड को फिल्टर कर देती है और यह यूरिन के जरिए शरीर से बाहर निकल जाता है। लेकिन जब शरीर में यूरिक एसिड ज्यादा बनने लगता है या किडनी फिल्टर नहीं कर पाती तो खून में यूरिक एसिड का लेवल बढ़ जाता है। जो हड्डियों के बीच में जमा हो कर दर्द पैदा करता है। यूरिक एसिड के बढ़ने को हाइपरयुरिसीमिया भी कहा जाता है। इससे गाउट नाम की बीमारी लग सकती है जिससे जोड़ों में दर्द उठता है। यह आपके खून और यूरिन को काफी एसिडिक भी बना सकता है।  शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने से कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। शरीर में यूरिक एसिड के बढ़ने से दूसरे अंगों पर बुरा असर पड़ता है। यूरिक एसिड की अधिकता से किडनी की बीमारी जैसे किडनी की पथरी और मोटापा जैसी कई समस्याएं हो सकती है। यूरिक एसिड बढ़ने पर ब्लड प्रेशर, थायराइड और डायबिटीज जैसी घातक बीमारियों का खतरा भी होता है। यूरिक एसिड में वात एवं रक्त एक साथ प्रकुपित होते हैं। बढ़े हुए दूषित रक्त के द्वारा वायु का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है। ...

कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol)

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  शरीर में लिवर द्वारा निर्मित मोम या वसा जैसे पदार्थ को ही कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) या लिपिड (lipid) कहते हैं। अलग-अलग तरह की विभिन्न शारीरिक क्रियाओं को संपन्न करने के लिए उचित मात्रा में कोलेस्ट्रॉल का शरीर में होना अनिवार्य है। कोशिका झिल्ली, विटामिन डी, पाचन और कई तरह के हार्मोन जैसे- एस्ट्रोजेन, प्रोजेस्टेरॉन, टेस्टोस्टेरॉन, कोर्टिसोल और एल्डोस्टेरॉन के निर्माण के लिए कोलेस्ट्रॉल की जरूरत होती है। इसके अलावा बाइल सॉल्ट (पित्त लवण) में भी कोलेस्ट्रॉल मौजूद रहता है जो फैट को सही तरीके से पचाने में मदद करता है। साथ ही कोलेस्ट्रॉल विटामिन ए, डी, ई और के को शरीर में अवशोषित करने में भी मदद करता है। सूर्य की रोशनी की मौजूदगी में शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मदद से ही विटामिन डी का उत्पादन होता है। कोलेस्ट्रॉल खून में प्रोटीन और लिपिड से बने संरचनात्मक द्रव के रूप में मौजूद रहता है और कोलेस्ट्रॉल और प्रोटीन युक्त इसी तत्व को लिपोप्रोटीन कहा जाता है। लिप्रोप्रोटीन्स कोलेस्ट्रॉल को रक्तप्रवाह के माध्यम से शरीर के अन्य अंगों में पहुंचाने में मदद करता है। लिपोप्रोटीन्स मुख्य रूप से दो तरह क...

प्लेटलेट्स को बढ़ाने के घरेलू उपाय

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हमारे शरीर में सभी अंग और सेल्स ही हैं, जो मिलकर हमें निरोगी और सेहतमंद जीवन देने में मदद करते हैं। कुछ ऐसा ही मैन रोल है ब्लड में मौजूद प्लेटलेट्स का है, जिनका शरीर में सही मात्रा में होना यह सुनिश्चित करता है कि हम स्वस्थ हैं । एक स्वस्थ व्यक्ति में सामान्य प्लेटलेट्स काउंट डेढ़ लाख से 4.50 लाख प्रति माइक्रोलीटर होता है, जब यह काउंट डेढ़ लाख  प्रति माइक्रोलीटर से नीचे चला जाए तो इसे लो प्लेटलेट माना जाता है। कई बार प्लेटलेट्स कम होने और न बनने की वजह से शरीर कई तरह के विकार और बीमारियों की चपेट में आ जाता है।  प्लेटलेट्स क्या है? ब्लड में तीन प्रकार की सेल्स होती हैं, रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स ,और प्लेटलेट। प्लेटलेट्स को थ्रोम्बोसाइट्स (Thrombocytes) भी कहा जाता है, जो ब्लड सेल्स के रंगहीन चिपचिपे छोटे-छोटे टुकड़े होते हैं। यह आपके बोन मैरो (Bone Marrow) में बनते हैं। प्लेटलेट्स ब्लड कलोटिंग (रक्त थक्के बनाने) में  प्रमुख भूमिका निभाते हैं। आमतौर पर, जब आपकी ब्लड वेसल डेमेज हो जाती है, तो आपका ब्लड बहने लगता है। इस दौरान आपके प्‍लेटलेट्स को सिग्नल भेजा जाता है. ...