समय के आधार पर निदान (Time Diagnosis)

 

निदान कैसे करें?(How to Diagnose the Disease?)

(1) उम्र के अनुसार निदान (Diagnosis as per Age Factor)

(2) माँसपेशीय निदान (Muscles Diagnosis)

(3) समय के आधार पर निदान (Time Diagnosis)

(4) मौसम के आधार पर निदान (Seasonal Diagnosis)

(5) यिन-यांग के सिद्धान्त के आधार पर निदान (Diagnosis on Yin-Yang Principle Basis)

(6) शरीर तंत्र के आधार पर निदान (Diagnosis as per Body System)

(7) चेहरे के आधार पर निदान (Face Diagnosis)

(8) रंगों द्वारा निदान (Diagnose by Colour)

(9) सूँघकर निदान (Diagnose by Smell)

(10) स्वाद के आधार पर निदान (Diagnose by Taste)

(11) आवाज के आधार पर निदान (Diagnose by Sound)

(12) आँखों को देखकर निदान  (Functional Eye Diagnose)

(13) हाथों की जाँच करके निदान (Diagnose by Hand)

(14) शरीर संरचना को देखकर निदान (Diagnose by Observation of Body Constitution)

(15) जीभ देखकर निदान (Diagnose by Tongue)


3. समय के आधार पर निदान (Time Diagnosis)

समय के आधार पर भी निदान किया जा सकता है। समय के आधार पर निदान हेतु समय को हम वर्ष दिन व घण्टे में बाँटते हैं तथा यह देखा जाता है कि शरीर में उस समय किस अंग मेरिडियन की ऊर्जा का समय है। हमारी 24 घण्टे की घड़ी में प्रत्येक अंग मेरिडियन की एक निर्धारित ऊर्जा दो घण्टे के लिए शरीर में परिसंचरण करती है वह समय उस ऊर्जा का अधिक क्रियाशीलता का समय होता है।



जैविक घड़ी पर आधारित दिनचर्या | Biological Clock of Human Body 

Biological Clock (जैविक घड़ी) of Human Body 

● प्रातः 3 से 5 – ( जीवनी शक्ति विशेषरूप से फेफ़डों में होती है )

थोड़ा गुनगुना पानी पीकर खुली हवा में घूमना एवं प्राणायाम करना। शरीर स्वस्थ व स्फूर्तिमान होता है। ब्राह्ममुहूर्त में उठनेवाले लोग बुद्धिमान व उत्साही होते हैं और सोते रहनेवालों का जीवन निस्तेज हो जाता है ।

● प्रातः 5 से 7 – ( बड़ी आँत में )

प्रातः जागरण से लेकर सुबह ७ बजे के बीच मल-त्याग एवं स्नान कर लेना चाहिए । सुबह ७ बजे के बाद जो मल-त्याग करते हैं उन्हें अनेक बीमारियाँ होती हैं ।

● सुबह 7 से 9 – ( अमाशय यानी जठर में )

इस समय ( भोजन के २ घंटे पूर्व ) दूध अथवा फलों का रस या कोई पेय पदार्थ ले सकते हैं ।

● 9 से 11– ( अग्न्याशय व प्लीहा में ) 

यह समय भोजन के लिए उपयुक्त है । भोजन के बीच-बीच में गुनगुना पानी ( अनुकूलता अनुसार ) घूँट-घूँट पीयें ।

● दोपहर 11 से 1 –( हृदय में )

दोपहर १२ बजे के आसपास मध्याङ्घ-संध्या करने का हमारी संस्कृति में विधान है । भोजन वर्जित ।

● दोपहर 1 से 3 – ( छोटी आँत में )

भोजन के करीब २ घंटे बाद प्यास-अनुरूप पानी पीना चाहिए । इस समय भोजन करने अथवा सोने से पोषक आहार-रस के शोषण में अवरोध उत्पन्न होता है व शरीर रोगी तथा दुर्बल हो जाता है ।

● 3 से 5 – ( मूत्राशय में )

२-४ घंटे पहले पिये पानी से इस समय मूत्र-त्याग की प्रवृत्ति होगी ।

● शाम 5 से 7 – ( गुर्दे में )

इस समय हलका भोजन कर लेना चाहिए । सूर्यास्त के १० मिनट पहले से १० मिनट बाद तक (संध्याकाल में) भोजन न करें । शाम को भोजन के तीन घंटे बाद दूध पी सकते हैं ।

● रात्रि 7 से 9 – ( मस्तिष्क में )

इस समय मस्तिष्क विशेष रूप से सक्रिय रहता है । अतः प्रातःकाल के अलावा इस काल में पढ़ा हुआ पाठ जल्दी याद रह जाता है ।

● रात्रि 9 से 11 – ( रीढ़ की हड्डी में स्थित मेरुरज्जू में )

इस समय की नींद सर्वाधिक विश्रांति प्रदान करती है । इस समय का जागरण शरीर व बुद्धि को थका देता है ।

● रात्रि 11 से 1 – ( पित्ताशय में )

इस समय का जागरण पित्त-विकार, अनिद्रा, नेत्ररोग उत्पन्न करता है व बुढ़ापा जल्दी लाता है । इस समय नई कोशिकाएँ बनती हैं ।

● 1 से 3 – ( यकृत में )

इस समय का जागरण यकृत (लीवर) व पाचन तंत्र को बिगाड़ देता है ।



प्रत्येक समय में संचरित होने वाली ऊर्जा इस संसार की प्रत्येक घटनाओं पर अपना प्रभाव डालती है। साधारणतः जब शरीर का कोई अंग बीमार होता है तो यह देखा जाता है कि किस समय पर वह बीमार हुआ है, देखा जाता है व प्रभावित अंग का पता लगाया जाता है। यह जाना जाता है कि उस अंग विशेष की ऊर्जा बढ़ी हुई (Excessive) है या कम (Deficient) है। यह भी देखा जाता है कि यिन ऊर्जा अवरुद्ध है या यांग ऊर्जा अवरुद्ध है तथा उसी अनुसार निर्णय लिया जाता है।

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